घर पर हाइपरएक्टिव बच्चे से कैसे निपटें?HealthPlanet

Posted on Sat 10th Dec 2022 : 16:56

हाइपर एक्टिव बच्चों को कैसे सिखाएं कोई भी काम, जानें कुछ खास ट्रिक्स

बच्चों को समझाने और पढ़ाने के लिए पैरेंट्स को बहुत ही सूझबूझ से काम करना होता है.
आपका बच्चा हर समय सक्रिय (Active) है. किसी भी चीज पर शांत मन से ध्यान नहीं लगा पाता है. स्कूल में उसकी हरकतें बाकी बच्चों से अलग होती हैं. वह बिना वजह आपा खोता हो या फिर वो हर समय बोलता ही रहता हो. इतना ही नहीं वह दूसरों को बोलने का भी मौका न देता हो तो ऐसे बच्चों के पैरेंट्स (Parents) को विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है क्योंकि यह अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) यानि ध्यान की कमी और अत्यधिक सक्रियता की बीमारी है. ऐसे बच्चों की जांच के लिए ब्लड टेस्ट (Blood Test) और हॉर्मोनल टेस्ट (Hormonal Test) किए जाते हैं. साथ ही बच्चे के खानपान में हुई गड़बड़ी को पहचान मनोवैज्ञानिक तौर पर इलाज किया जाता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है एडीएचडी (ADHD) और इसके उपाय.

क्या है एडीएचडी
चीजों पर ध्यान की कमी और अत्यधिक सक्रियता की बीमारी को एडीएचडी (Attention Deficit Hyper Activity Disorder) कहते हैं. जिन घरों में तनावपूर्ण माहौल होता है वहां इनकी स्थिति ज्यादा बिगड़ जाती है. साथ ही बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा जोर देने से बच्चा एडीएचडी का शिकार हो जाता है. यह समस्या अधिकतर प्री-स्कूल और केजी कक्षाओं के बच्चों में देखी जाती है. अध्ययनों के मुताबिक, भारत में तकरीबन 1.6 फीसदी से 12.2 फीसदी तक बच्चों में एडीएचडी (ADHD) की समस्या देखी जाती है.

एडीएचडी पीड़ित बच्चों को समझाने के कुछ उपाय

पैरेंट्स बच्चों को समझें
अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) वाले बच्चों के पैरेंट्स पहले इस बात को जान लें कि आपका बच्चा वाकई दूसरे बच्चों से अलग हरकतें करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपका बच्चा असामान्य स्थिति में है. पहले तो आप अपने बच्चे को दूसरों के सामने असामान्य बिल्कुल भी न कहें. आपको अपने बच्चे की हाइपर एक्टिविटी को स्वीकारना होगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो नतीजन बच्चे के मन में हीन भावना घर कर जाती है और परिणामस्वरूप वह जिद्दी होकर मनमानी पर उतर आते हैं.

दवाई नहीं है उचित इलाज
एडीएचडी पीड़ित बच्चों के लिए मेडिकल साइंस ने कई किस्म की दवाईयां तैयार की है. छोटी उम्र में बच्चों के लिए ज्यादा दवाईयों का सेवन उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है. पैरेंट्स कोशिश करें कि घर में उनके लिए सामान्य और सकारात्मक माहौल रहे. बच्चे की क्षमता को पहचानें और उसे वही काम करने के लिए प्रेरित करें. बच्चों की क्षमता से अलग काम बिल्कुल भी न सौंपे.

किसी भी चीज के लिए दवाब न डालें
ऐसे बच्चों को समझाने और पढ़ाने के लिए पैरेंट्स को बहुत ही सूझबूझ से काम करना होगा. आप बच्चे की आदतों को पहचानें और उन्हें उनकी हॉबी के अनुसार ही चलने दें, रोकने पर आपका बच्चा चिड़चिड़ापन का शिकार हो सकता है. उसकी हौसला अफजाई के लिए एक्टिविटी में हिस्सा लें.

मानसिक और शारीरिक अवस्था को समझें
ऐसे बच्चों के लिए जरूरी है कि पैरेंट्स उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति और जरूरत को ध्यान में रखें. उनकी बातों पर ध्यान लगाएं और उनके साथ समय बिताएं. अगर आप अपने बच्चे को रोजाना 10 से 15 मिनट सुनेंगे तो आपके लिए उसे समझाना और समझना आसान हो जाएगा.

खान-पान का ख्याल रखें
बच्चों को पोषित भोजन ही दें. फल, सब्जियां और साबुत अनाज उनकी डाइट में जरूर शामिल करें. बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए उनका खानपान और शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने के लिए उनका डाइट चार्ट बना लें.

दूसरों के बच्चों से तुलना न करें
एडीएचडी से ग्रसित बच्चे जल्दी गुस्सा करने के शिकार हो जाते हैं. ऐसे में पैरेंट्स कोशिश करें कि उनके सामने दूसरे बच्चों से उनकी तुलना न करें और उन्हें नीचा न दिखाएं. उनसे किसी तरह की जबरदस्ती न करें. चीजों को समझने के लिए उन्हें समय दें.

नियमित एक्सरसाइज करवाएं
इन बच्चों को नियमित वर्कआउट के लिए तैयार करें. ऐरोबिक्स की मदद लें. इससे उनका तनाव कम होगा क्योंकि इससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ेगा. इस दौरान एंडॉफर्फिन हॉर्मोन का स्राव होता है जिससे बच्चों के अंदर खुशी का आभास होता है. कोशिश करें कि बच्चों को रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करवाएं.

इनाम और पुरस्कार दें
बच्चों की मानसिक स्थिति में सुधार और व्यवहार में सकारात्मकता लाने के लिए उन्हें उनके अच्छे कामों के लिए इनाम दें. उनके व्यवहार में सुधार लाने के लिए आप स्टार सिस्टम को चुन सकते हैं या फिर उन्हें अंक दे सकते हैं.

चेतावनी के संकेतों पर नजर रखें
यदि आपको ऐसा आभास हो रहा है कि आपका बच्चा अपना आपा खोने वाला है तो जरूरी है कि आप उस पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दें और उसे किसी और एक्टिविटी में व्यस्त कर दें.

दोस्तों को घर बुलाएं
बच्चा घर में अकेला पड़े-पड़े ऊबाउ होकर विचलित न हो इसके लिए जरूरी है कि मौहल्ले के दो-चार बच्चों को घर में बुलाएं. बच्चों के आपसी मेल-जोल से उसका मानसिक विकास होगा. इस दौरान ध्यार रखें की आपका बच्चा खुद पर नियंत्रण न खो दे.

पर्याप्त नींद लेने दें
पर्याप्त नींद मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत जरूरी होता है. नींद हर उम्र के वर्ग के लोगों के लिए जरूरी है. बच्चे के सोने के दौरान उसे किसी गतिविधि में न उलझाएं और न उलझने दें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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